पशुमित्र क्या है ?

पशुमित्र वे लोग हैं जो पशु चिकित्सा देखभाल के हिस्से के रूप में अपने कर्तव्यों के प्रदर्शन में पशु चिकित्सक की सहायता करते हैं, या स्वाभाविक रूप से पशु स्वास्थ्य प्रक्रियाएं करते हैं। पशुमित्र जानवरों के स्वास्थ्य की देखभाल करते हैं और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए काम करते हैं। वे पालतू जानवरों, पशुओं और अन्य जानवरों की चिकित्सा स्थितियों और बीमारियों का निदान, उपचार और शोध करते हैं।

पशुमित्र के कर्तव्य :
  • जानवरों की अपनी स्वास्थ्य समस्याओं का निदान करने के लिए जांच करना
  • जानवरों पर सर्जरी करना
  • बीमारियों के खिलाफ परीक्षण और टीकाकरण
  • एक्स-रे मशीनों जैसे चिकित्सा उपकरण संचालित करना
  • सामान्य देखभाल, चिकित्सा परिस्थितियों और उपचार के बारे में पशु मालिकों को सलाह देना
पशुमित्र के जानने योग्य बातें :

प्रत्येक पशुमित्र को सर्वप्रथम गाय के प्रकार ज्ञात होने चाहिए

गाय के प्रकार:

1. साहीवाल प्रजाति : यह प्रजाति कि गाय भारत में कहीं भी रह सकती है। ये दुग्ध उत्पादन में अच्छी होती है । इस प्रजाति कि गाय के गाये लाल रंग की होती है। शरीर लम्बा टांगे छोटी होती है। छोटा माथा छोटे सींघ और गर्दन के नीचे त्वचा लोर होता है। ये ब्याने के बाद 10 माह तक दूध देती है। दूध का औसत प्रतिदिन 10 से 16 लीटर होता है। ये पंजाब में रावी नदी के आसपास और लोधरान, गंजिवार , लायलपुर, आदि जगह पर पायी जाती है।

2. रेड सिंधी : इसका मुख्य स्थान पाकिस्तान का सिंध प्रान्त माना जाता है। इसका रंग लाल बादामी होता है। आकार में साहीवाल से मिलती जुलती होती है। इसके सींग जड़ों के पास से काफी मोटे होते है पहले बाहर को और निकले हुए अंत में ऊपर की और उठे हुए होते है । शरीर की तुलना में इसके कुबड बडे आकार के होते है। इसमे रोगों से लड़ने की अदभुत क्षमता होती है इसका वजन औसतन 350 किलोग्राम तक होता है। ब्याने के 300 दिनों के भीतर ये 200 लीटर दूध देती है।

3. गिर जाती की गाय : इसका मूल स्थान गुजरात के काठियावाड का गिर क्षेत्र है। इसके शरीर का रंग पूरा लाल या सफेद या लाल सफेद काला सफेद हो सकता है। इसके कान छोटे और सींग पीछे की ओर मुड़े हुए होते है। औसत वजन 400 किलोग्राम दुग्ध उत्पादन 1700 से 2000 किलोग्राम तक ही माना गया है।

4. थारपारकर : इसकी उत्पत्ति पाकिस्तान के सिंध के दक्षिण पश्चिम का अर्ध मरुस्थल थार में माना जाता है। इसके शरीर का रंग खाकी भूरा या सफेद होता है। इसका मुँह लम्बा और सींगो के बीच में होता है। इसका औसत वजन 400 किलोग्राम का होता है।इसकी खुराक कम होती है औसत दुग्ध उत्पादन 1400 से 1500 किलोग्राम होता है।

5. काँकरेज : गुजरात के कच्छ से अहमदाबाद और रधनपुरा तक का प्रदेश इनका मूल स्थान है।ये सर्वांगी वर्ग की गाये होती है। इनकी विदेशो मे भी काफी मांग रहती है। इनका रंग काला भूरा लोहिया होता है। इनकी चाल अटपटी होतीं है इसका दुग्ध उत्पादन 1300 से 2000 किलोग्राम तक रहता है।

6. मालवी : ये गाय दुधारू नही होती है इनका रंग काफी सफ़ेद और गर्दन पर हल्का काला रंग होता है। ये ग्वालियर के आसपास पायी जाती है।

7. गोरी : ये राजस्थान के जोधपुर इनका प्राप्ति स्थान है। ये ज्यादा दुधारू नहीँ ' होती है लेकिन ब्याने के बाद कुछ दिन दूध देती है।

8. पवार :

इस जाती को गाय को गुस्सा जल्दी आ जाता है। ये पीलीभीत पूरनपुर खीरी मूल स्थान है। इसके सींग सीधे और लम्बे होते है और पूंछ भी लम्बी होती है इसका दुग्ध उत्पादन भी कम होता है।

9. हरियाणा :

इसका मूल स्थान हरियाणा के करनाल, गुडगाँव , दिल्ली है। ये ऊंचे कद और गठीले बदन की होती है। इनका रंग सफेद मोतिया हल्का भूरा होता है इन से जो बैल बनते है तो खेती के कार्य और बोझ ढोने के लिए उपयुक्त होते है। इसका औसत दुग्ध उत्पादन 1140 से 3000 किलोग्राम तक होता है।

10. अंगनाडी:

ये नाडी नदी के आसपास पाई जाती है। इसका मुख्य भोजन ज्वार पसंद है। इसको नाडी घास और उसकी रोटी बना कर खिलाई जाती है। ये दूध अच्छा देती है।

11. दज्जाल :

ये पंजाब के डेरागाजीखा जिले मे पायी जाती है उसका दूध भी कम रहता है।

12. देवनी :

ये आंध्र प्रदेश के उत्तर दक्षिणी भागों में पायी जाती है ये दूध अच्छा देती है और इसके बैल भी खेती के लिए अच्छे होते है।

13. निमाड़ी :

नर्मदा घाटी इसका प्राप्ति स्थान है। ये अचछी दूध देने वाली होती है।

14. राठ :

ये अलवर राजस्थान की गाय है ये खाती कम है और दूध भी अच्छा देती है।

भारत में गाय की 14 प्रकार की शुद्ध नस्ल पायी जाती है । जिसमें सबसे ज्यादा दूध देने वाली नस्ल निम्न हैं :-

  • 1) गिर आय (सालाना -2000-6000 लीटर दूध, स्थान -सौराष्ट्र , गुजरात)
  • 2) साहिवाल गाय (सालाना -2000-4000 लीटर दूध, स्थान -उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब)
  • 3) लाल सिंधी (सालाना -2000-4000) लीटर दूध, स्थान-उत्त्पत्ति सिंध में लेकिन अभी पूरे भारत में)
  • 4) राठी (सालाना-1800-3500 लीटर दूध, स्थान-राजस्थान, हरियाणा, पंजाब)
  • 5) थरपार्कर (सालाना-1800-3500 लीटर दूध, स्थान-सिंध, कच्छ, जैसलमेर, जोधपुर)
  • 6) कांक्रेज (सालाना -1500-4000 लीटर दूध, स्थान-उत्तरी गुजरात व राजस्थान)


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