पशुधन सेवा केन्द्र

इस परियोजना के अंतर्गत मिशनद्वारा निर्धारित राज्यों में प्रत्येक जिले की न्याय पंचायत में पशुधन सेवा केंद्र का संचालन पशु स्वाथ्य कार्यकर्ता के माध्यम से करते हुए पशुपालन को निर्धारित रूप प्रदान किया जायेगा।

पशुधन क्षेत्र में विश्‍वसनीय एवं प्रभावी विश्‍लेषणात्‍मक सेवाओं के महत्‍व एवं आवश्‍यकता को मान्‍यता देते हुए, राष्‍ट्रीय डेरी विकास बोर्ड ने एक बहु विषयक प्रयोगशाला अर्थात पशुधन एवं आहार विश्‍लेषण तथा अध्‍ययन केंद्र (काफ) 2009 में आणंद में स्‍थापित की । यह प्रयोगशाला अत्‍याधुनिक उपकरणों, आधुनिक तकनीकों तथा योग्‍यता प्राप्‍त तकनीकी कार्मिकों से सु‍सज्जित है। प्रयोगशाला डेरी उत्‍पाद और आहार, पशु आहार एवं घटक तथा आनुवंशिकी के क्षेत्र में विश्‍वसनीय तथा शुद्ध विश्‍लेषणात्‍मक जांच सुविधाएं मुहैया कराता है ।
भारतीय मानक की आवश्‍यकता के अनुसार रासायनिक मिश्रण के लिए मिश्रित पशु आहार तथा विभिन्‍न कच्‍चे पदार्थों का विश्‍लेषण करती है । इसके अतिरिक्‍त भारतीय मानक के अनुसार विटामिन्‍स, खनिज पदार्थों, विषैले पदार्थों के लिए सैंपलों का संरचनात्‍मक विश्‍लेषण किया जाता है । अन्‍य महत्‍वपूर्ण जांचे गए उत्‍पाद विटामिन प्रीमिक्‍सेस तथा पशु चि‍कित्‍सा पूरक, उपचारित बायपास प्रोटीन घटक तथा बायपास फैट है ।

पशु व्यापार

  • • पशुओं के वध के लिए उनकी पशु बाजार में खरीद फरोख्त पर प्रतिबंध लगाने से मांस एवं चमड़े के निर्यात एवं कारोबार पर असर पड़ा है।
  • • वर्तमान पर्यावरण संरक्षण नीतियों एवं विधिक नियमो के अनुरूप पशुधन विकास मिशन ने यह निश्चय किया है कि संगठन के कार्यकर्ताओं के सहयोग से पशुधन सेवा केन्द्रो के माध्यम से समस्त पशुधन उत्पादों के व्यापार एवं विपणन को इ-कृषि बाजार एवं मिशन द्वारा संचालित देवा ऍप द्वारा एक सरल एवं सुगम मंच प्रदान किया जायेगा ताकि ग्रामीण/पशुपालक सुगमता पूर्वक पशुधन एवं पशुधन उत्पादों का समुचित मूल्य प्राप्त कर सके |
  • • केन्द्र की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल पीएस नरसिम्हा ने पीठ को बताया कि यह अधिसूचना जारी करने के पीछे मंशा देश भर के मवेशी बाजारों के लिए नियमन प्रणाली लाने की है।
  • • केन्द्र ने अधिसूचना जारी कर देश भर के मवेशी बाजारों में वध के लिए पशुओं का क्रय-विक्रय किए जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह प्रतिबंध पर्यावरण मंत्रालय की अधिसूचना पशुओं पर क्रूरता की रोकथाम अधिनियम, 2017 पशुओं पर क्रूरता की रोकथाम कानून के तहत जारी की गई है।

पशुधन बीमा योजना

  • • पशुपालन राष्ट्रीय, विशेष रूप से ग्रामीण, अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तम्भ है। हमारे देश में अधिकांश पशुपालक लघु या सीमांत वर्ग के गरीब किसान है।
  • • उनके लिए जीविका का मुख्य साधन पशुपालन है, वे ज्यादा पैसा लगाकर अच्छी नस्ल के दुधारू पशु को खरीदते है और ऐसे में यदि पशु की आकस्मिक मौत हो जाये तो उनको काफी नुकसान होता है तथा उनके लिए अपने परिवार का पालन पोषण करना मुश्किल हो जाता है।
  • • कई बार पशु अकाल मौत के शिकार हो जाते हैं और उनका बीमा न होने के कारण पशुपालक को आर्थिक नुकसान होता है। ऐसे में पशु बीमा योजना उनके लिए वरदान है।
  • •योजना में शामिल पशु: देशी/संकर दुधारू मवेशी और भैंस योजना की परिधि के अंतर्गत आएंगे। दुधारू पशु/ भैंस में दूध देनेवाले और नहीं देनेवाले के अलावा वैसे गर्भवती मवेशी, जिन्होंने कम से कम एक बार बछड़े को जन्म दिया हो, शामिल होंगे। ऐसे मवेशी जो किसी दूसरी बीमा योजना अथवा किसी अन्य योजना के अंतर्गत शामिल किये गये हों, उन्हें इस योजना में शामिल नहीं किया जाएगा।
  • पशुओं के बाजार मूल्य का निर्धारण: किसी पशु की बीमा उसके अधिकतम बाजार मूल्य पर की जाती है| जिस बाजार मूल्य पर बीमा की जाती है उसे लाभार्थी, अधिकृत पशु चिकित्सक एवं बीमा एजेंट द्वारा सम्मिलित रूप से की जाती है।

पशु पालन

  • • पशुपालन कृषि विज्ञान की वह शाखा है जिसके अंतर्गत पालतू पशुओं के विभिन्न पक्षों जैसे भोजन, आश्रय, स्वास्थ्य, प्रजनन आदि का अध्ययन किया जाता है। पशुपालन का पठन-पाठन विश्व के विभिन्न विश्वविद्यालयों में एक महत्वपूर्ण विषय के रूप में किया जा रहा है।
  • • भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि एवं पशुपालन का विशेष महत्व है। सकल घरेलू कृषि उत्पाद में पशुपालन का 28-30 प्रतिशत का योगदान सराहनीय है जिसमें दुग्ध एक ऐसा उत्पाद है जिसका योगदान सर्वाधिक है। भारत में विश्व की कुल संख्या का 15 प्रतिशत गायें एवं 55 प्रतिशत भैंसें है और देश के कुल दुग्ध उत्पादन का 53 प्रतिशत भैंसों व 43 प्रतिशत गायों or goat 3% से प्राप्त होता है।
  • • भारत लगभग 121.8 मिलियन टन दुग्ध उत्पादन करके विश्व में प्रथम स्थान पर है जो कि एक मिसाल है और उत्तर प्रदेश इसमें अग्रणी है। यह उपलब्धि पशुपालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं ; जैसे- मवेशियों की नस्ल, पालन-पोषण, स्वास्थ्य एवं आवास प्रबंधन इत्यादि में किए गये अनुसंधान एवं उसके प्रचार-प्रसार का परिणाम है।
  • • लेकिन आज भी कुछ अन्य देशों की तुलना में हमारे पशुओं का दुग्ध उत्पादन अत्यन्त कम है और इस दिशा में सुधार की बहुत संभावनायें है। छोटे, भूमिहीन तथा सीमान्त किसान जिनके पास फसल उगाने एवं बड़े पशु पालने के अवसर सीमित है, छोटे पशुओं जैसे भेड़-बकरियाँ, सूकर एवं मुर्गीपालन रोजी-रोटी का साधन व गरीबी से निपटने का आधार है।
  • • इस तरह पशुपालन व्यवसाय में ग्रामीणों को रोजगार प्रदान करने तथा उनके सामाजिक एवं आर्थिक स्तर को ऊँचा उठाने की अपार सम्भावनायें हैं।

पशु कल्याण

  • • मानव हित के लिए पशुओं को पालने का मुद्दा मनुष्यों तथा पशुओं के बीच सम्बन्ध पर पशुओं की स्थिति तथा लोगों के दायित्व पर प्रश्न उठाता है। पशु कल्याण एक दृष्टिकोण है कि मनुष्यों की देखभाल में रह रहे पशुओं को अनावश्यक रूप से कष्ट नहीं उठाना चाहिए. 'अनावश्यक' कष्ट उठाना क्या है, इसके विषय में विभिन्न मत हो सकते हैं।
  • • आम तौर पर, हालांकि, पशु कल्याण खेती प्रथाओं पर वैज्ञानिक अनुसंधान की एक व्याख्या के परिप्रेक्ष्य पर आधारित है। इसके विपरीत, पशुओं के अधिकार का दृष्टिकोण है कि लाभ के लिए पशुओं का उपयोग, अपनी प्रकृति के अनुसार, पालन प्रथाओं के बावजूद, आमतौर पर शोषण ही है। पशु-अधिकार कार्यकर्ता आम तौर पर शाक खाने वाले अथवा शाकाहारी ही होते हैं, हालांकि पशु-अधिकार दृष्टिकोण के साथ ही सुसंगत है कि उत्पादन प्रक्रम के आधार पर मांस खाया जा सकता है।
  • • पशु कल्याण समूह आम तौर पर पशुधन पालन की प्रथाओं पर सार्वजनिक चर्चा करते हुए पशुधन के उद्योगों पर अधिक नियंत्रण तथा जांच का अनुमोदन करते हैं। पशु अधिकार समूह आमतौर पर पशुओं की पालन का उन्मूलन चाहते हैं, हालांकि कुछ समूह पहले अधिक कठोर विनियमन को प्राप्त करने की आवश्यकता को पहचानते हैं।
  • • पशुओं को बेचने और वध के लिए लंबी दूरी तक यात्रा करनी पड़ सकती है। भीड़ की स्थिति, उष्णकटिबंधीय क्षेत्र की गर्मी तथा भोजन, पानी तथा आराम की अनुपलब्धता विधान बनाने तथा विरोध का कारण बनते हैं। (देखें जीवित निर्यात) पशुधन का वध सम्बन्धी विधान शुरूआती लक्ष्यों में से एक था। ऐसे अभियान हलाल और कोषेर जैसी धार्मिक वध तकनीकों को भी निशाने पर लाते हैं।

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